अमेरिका चुनावः डोनाल्ड ट्रंप की जीत से भारत को होंगे ये 5 बड़े नुकसान

एक साल के ताबड़तोड़ प्रचार पर अमेरिकियों ने अपने फैसला लगभग सुना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर भारत समेत सारी दुनिया की नजर थी। अमेरिका का 45वां राष्ट्रपति भारत के लिहाज से कैसा साबित होगा? या अगर रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं तो यह भारत के लिए कैसा होगा?

ये अब बड़े सवाल हैं।
अमेरिका के साथ भारत के पुराने अनुभव बताते हैं कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति सामान्य तौर पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार से बेहतर साबित हुए हैं लेकिन पिछले कुछ सालों में अमेरिका और भारत के संबंध तेजी से बदलते रहे हैं। आइए देखते हैं ट्रंप का राष्ट्रपति बनना भारत के लिहाज से कैसा है...
क्या होगा भारत को नुकसान
1- दुनियाभर के बाजार नहीं चाहते कि ट्रंप राष्ट्रपति बने। लिहाजा बाजार की ट्रंप की जीत पर तीखी प्रतिक्रिया होगी। वह उदार अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानूनों का समर्थन नहीं करते हैं।
2 - ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी ऐसी है जिसमें 'पहले सिर्फ अमेरिका' होता है और वह सभी व्यापार समझौते को नए सिरे से लागू करना चाहते हैं, भारत के साथ भी वह यही करने के पक्षधर है।
3- ट्रंप एच1बी वीजा प्रोग्राम के खिलाफ हैं और इसे बंद करना चाहते हैं। अगर ट्रंप जीतते हैं तो भारतीय आईटी स्टॉक और आईटी कंपनियों को इसका नुकसान होगा।
4 -एक तरफ वह भारत की तारीफ करते हैं तो दूसरी ओर आरोप लगाते रहे हैं कि भारत और चीन अमेरिका की नौकरियां छीन रहे हैं और वह इन्हें वापस लाएंगे। अमेरिका की नौकरी वापस लाने का मतलब है कि वह प्रवासियों के लिए मुश्किल कानून लाने वाले हैं। काम करने के मामले में अमेरिका भारतीयों की पहली पसंद है। लिहाजा नकरात्मक असर पड़ेगा।
5- डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में कॉर्रोपोरेट टैक्स को घटाकर 35 से 15 फीसदी कर सकते हैं। इसका असर यह होगा कि फोर्ड, जीएम और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियां दोबारा अमेरिका का रुख करेगी। यह मोदी की 'मेक इन इंडिया' स्कीम के लिए खतरनाक होगा।

on Wednesday, 9 November 2016 | | A comment?

70 साल तक भारत को लुटने वाली कांग्रेस को मोदी जी ने 70 मिनट में लुट लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि मई 2014 में जब मुझे देश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब ब्रिक्स के I (आई) अक्षर को लुढ़कता बताया गया था।

 लेकिन विकास की इस दौड़ में हमारा मूल मंत्र सबका साथ सबका विकास रहा है। आज अर्थव्यवस्था में भारत एक चमकता हुआ सितारा है।


पीएम ने अपनी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार गरीबों को समर्पित है। पहले गरीबों का हक नजरअंदाज किया गया। लेकिन हमारी सरकार गरीबों के विकास के लिए जनधन योजना लायी। देश से गरीबी हटाने में भ्रष्टाचार और कालाधन सबसे बड़ी रुकावट है। आज हम आर्थिक विकास में सबसे आगे है जबिक भ्रष्टाचार की ग्लोबल रैंकिंग में हम 100वें नं पर थे, लेकिन अब 76वें नं पर आ गए हैं।
आतंकवाद को लेकर पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि सीमा पार से आतंकवाद को पैसा दिया जाता है। सीमा पार से जाली नोटों का धंधा हो रहा है। अब जरूरत आतंकवाद और कालेधन पर निर्णायक लड़ाई की है क्योंकि कालाधन और आतंकवाद देश को बर्बाद कर रहा है। मोदी ने कहा कि अब देश के लोग चाहते हैं कि आतंकवाद, भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई हो। मोदी ने कहा कि कालेधन को रोकने के लिए 500 रुपये और हजार रुपये के नोट आज रात से बंद कर दिए जाएंगे।

मोदी से ट्रम्प की ट्यूनिंग पर देश की निगाहें, दोनों नेताओं के बीच 5 बातें हैं कॉमन

नई दिल्ली. डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के 45वें प्रेसिडेंट बनने जा रहे हैं। दुनिया की निगाहें ट्रम्प की पॉलिसी और बाकी देश के प्रेसिडेंट्स, पीएम से रिश्तों को लेकर टिकी है। किसके प्रति ट्रम्प का क्या रवैया होगा। अगर बात भारत और मोदी की करें तो ट्रम्प की ट्यूनिंग जम सकती है। अपने कैम्पेन के दौरान ट्रम्प इस ओर इशारा भी कर चुके हैं। रुझान आते ही मोदी ने ट्वीट कर नए अमेरिकी प्रेसिडेंट को बधाई भी दी। यही नहीं ट्रम्प और मोदी में कई समानताएं हैं जो दोनों को एक दूसरे के करीब ला सकती हैं। पांच मुद्दों पर ट्रम्प और मोदी की समानता....


1. जीतने के बाद विरोधियों की तारीफ
मोदी
- 2014 में जीतने के बाद मोदी ने मनमोहन की तारीफ की थी।
- चार्ज संभालने से पहले मोदी ने उस वक्त के पीएम से घर जाकर मुलाकात की थी।
ट्रम्प
- ट्रम्प ने बुधवार को जीत हासिल करने के बाद सबसे पहले हिलेरी की जिक्र किया।
- कहा- हिलेरी ने मुझे फोन किया। हम सबको बधाई दी। विदेश मंत्री के तौर पर देश हिलेरी के काम को याद रखेगा।
2. दूसरे देशों से रिश्ते
मोदी
- मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में सार्क नेताओं को बुलाया था।
- नवाज शरीफ समेत कई पड़ोसी नेता पहुंचे थे।
ट्रम्प
- किसी देश से दुश्मनी नहीं रखेंगे। अमेरिका को फिर से महान बनाएंगे।
3. सबको साथ लेकर चलने की बात
मोदी
- सबका साथ, सबका विकास का नारा। जाति-धर्म के बदले नेशन फर्स्ट की बात करना।
ट्रम्प
रिपब्लिकन-डेमोक्रेट मैं सबका प्रेसिडेंट हूं। सबको साथ लेकर चलूंगा।
4. राजनीतिक को लेकर रवैया
मोदी
- राजनीति में गंभीरता की एक अपनी जगह है लेकिन हमें आमोद-विनोद, हास्य, कमेट की जगह होनी चाहिए।
ट्रम्प
- खुले विचार वाले ट्रम्प कह चुके हैं- राजनीति बड़ी नैस्टी (गंदी) चीज है।
5. फॉरवर्ड रवैया
मोदी
- फॉरेन पॉलिसी हो या फिर किसी नेता से मुलाकात, मोदी हमेशा ही आगे हाथ बढ़ाते हैं।
ट्रम्प
- कैम्पेन में फॉरेन पॉलिसी को बेहतर बनाने की बात की। पर्सनल लेवल पर कनेक्शन अच्छा है।