'500, 1000 के नोट वापस लेने से नहीं लगेगा काले धन पर लगाम'

चेन्नई। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि 500 और 1,000 रुपये के नोट वापस लेने से काले धन पर लगाम लगाने में मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि यह विदेशी बैंकों, विदेशी मुद्रा, सोने या अन्य संपत्ति के रूप में जमा है।


एआईबीईए के महासचिव सी. एच. वेंकटचलम ने मंगलवार रात कहा, ‘‘हर कोई जानता है कि अधिकांश काला धन नकदी के रूप में कम और विदेशी बैंकों, विदेशी मुद्रा, सोने या अन्य संपत्ति के रूप में जमा है। इसलिए केवल यह कदम काले धन को बाहर लाने में मदद नहीं करेगा।’’
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘दूसरा, इस कदम से नकली नोटों की समस्या भी दूर नहीं हो सकती। इसलिए जब तक हम नकली नोटों के मूल कारण पर लगाम नहीं लगाएंगे, नए नकली नोट आ जाएंगे।’’
वेंकटचलम के अनुसार, वाणिज्यिक बैंकों की करीब 85,000 शाखाएं और सहकारी बैंकों की करीब एक लाख शाखाएं हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘देशभर में करीब 1,02,000 एटीएम हैं। जब तब आरबीआई बैंकों की शाखाओं और एटीएम में नए नोटों की आपूर्ति नहीं करता, जो कि अगले 24/48 घंटों में किसी भी प्रकार संभव नहीं है, आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि 500 और 1,000 के नोट हर व्यक्ति के द्वारा बेहद आमतौर पर प्रयोग किए जाते हैं।’’ 

on Wednesday, 9 November 2016 | | A comment?

आजादी के बाद भारत को सबसे बड़ा नुकसान, एक मिनट में डूबे सात लाख करोड़

नई दिल्ली। कालेधन को लेकर पीएम मोदी के फैसले और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का असर शेयर बाजार पर दिख रहा है। घरेलू स्टॉक मार्केट और इंटरनेशनल मार्केट क्रैश हो गए हैं. बुधवार को सेंसेक्स 1600 प्वांइट की गिरावट के साथ खुला।
निफ्टी भी 500 प्वाइंट की गिरावट के साथ 8,034 पर कारोबार कर रही है। लाइवइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई है। 8 नवंबर (मंगलवार) को बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 111.44 लाख करोड़ रुपये पर था।

Salute: 500 और 1000 रूपये के नोटों के बंद किये जाने पर अखिलेश ने मोदी सरकार को दी गजब की सलाह

केंद्र सरकार द्वारा 500 और 1000 रूपये के नोटों के प्रचलन को अचानक बंद कर दिए जाने के फैसले पर यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोदी सरकार को एक बड़ी नसीहत दी हैं. उन्होंने कहा है 500 और 1000 रूपये को बंद किये जाने के बाद केन्द्र सरकार को इस बड़ी बात का ध्यान जरुर रखना चाहिए कि किसी भी हालत में गांव में रहने वाले लोगों, गरीबों और किसान वर्ग के लोगों को परेशानीयों का सामाना न करना पड़े.
उन्होंने यह भी कहा कि 500 और 1000 रूपये के नोटों को नए नोटों या उसे कम के नोटों से बदलने के लिए मोदी सरकार को ग्रामीण इलाकों में विशेष शिविर लगाना चाहिए. अखिलेश के मुताबिक अगर केन्द्र यह व्यवस्था जल्द से जल्द कर दे तो इन लोगों के लिए ज्यादा बेहतर रहेगा.

अखिलेश के द्वारा केंद्र सरकार को दी इस सलाह की पुष्टि राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने भी की है. उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का यह कहना है कि आम नागरिकों और व्यापारियों को नोटों के बदलाव में किसी तरह की मुश्किल हालत नहीं पैदा होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण इलाकों में बैंक शाखाओं की संख्या कम है. इस वजह से ही केन्द्र सरकार को इन इलाकों में विशेष शिविर लगाकर पुराने नोटों को बदलने के इंतजाम कर देनी चाहिए.

अमेरिका चुनावः डोनाल्ड ट्रंप की जीत से भारत को होंगे ये 5 बड़े नुकसान

एक साल के ताबड़तोड़ प्रचार पर अमेरिकियों ने अपने फैसला लगभग सुना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर भारत समेत सारी दुनिया की नजर थी। अमेरिका का 45वां राष्ट्रपति भारत के लिहाज से कैसा साबित होगा? या अगर रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं तो यह भारत के लिए कैसा होगा?

ये अब बड़े सवाल हैं।
अमेरिका के साथ भारत के पुराने अनुभव बताते हैं कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति सामान्य तौर पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार से बेहतर साबित हुए हैं लेकिन पिछले कुछ सालों में अमेरिका और भारत के संबंध तेजी से बदलते रहे हैं। आइए देखते हैं ट्रंप का राष्ट्रपति बनना भारत के लिहाज से कैसा है...
क्या होगा भारत को नुकसान
1- दुनियाभर के बाजार नहीं चाहते कि ट्रंप राष्ट्रपति बने। लिहाजा बाजार की ट्रंप की जीत पर तीखी प्रतिक्रिया होगी। वह उदार अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानूनों का समर्थन नहीं करते हैं।
2 - ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी ऐसी है जिसमें 'पहले सिर्फ अमेरिका' होता है और वह सभी व्यापार समझौते को नए सिरे से लागू करना चाहते हैं, भारत के साथ भी वह यही करने के पक्षधर है।
3- ट्रंप एच1बी वीजा प्रोग्राम के खिलाफ हैं और इसे बंद करना चाहते हैं। अगर ट्रंप जीतते हैं तो भारतीय आईटी स्टॉक और आईटी कंपनियों को इसका नुकसान होगा।
4 -एक तरफ वह भारत की तारीफ करते हैं तो दूसरी ओर आरोप लगाते रहे हैं कि भारत और चीन अमेरिका की नौकरियां छीन रहे हैं और वह इन्हें वापस लाएंगे। अमेरिका की नौकरी वापस लाने का मतलब है कि वह प्रवासियों के लिए मुश्किल कानून लाने वाले हैं। काम करने के मामले में अमेरिका भारतीयों की पहली पसंद है। लिहाजा नकरात्मक असर पड़ेगा।
5- डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में कॉर्रोपोरेट टैक्स को घटाकर 35 से 15 फीसदी कर सकते हैं। इसका असर यह होगा कि फोर्ड, जीएम और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियां दोबारा अमेरिका का रुख करेगी। यह मोदी की 'मेक इन इंडिया' स्कीम के लिए खतरनाक होगा।