सरकार को घेरने वाले अरविन्द केजरीवाल खुद हो गये Twitter पर
1000 और 500 के नोट को बंद करने के फैसले को लेकर तमाम परेशानियां उठाने के बावजूद लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं. वहीं कुछ ऐसे नेता भी हैं, जो इसे एक स्टंट बता कर प्रधानमन्त्री को घेरने की तैयारी भी कर रहे हैं. घेरने वाले इस नेताओं की लिस्ट में सबसे ऊपर हैं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल. जो फेसबुक से लेकर ट्विटर तक उन्हें किसी न किसी तरह से निशाना बना रहे हैं. जिसे लेकर ट्विटर के कई यूज़र, अरविन्द केजरीवाल का अच्छाखासा ट्रोल बना रहे हैं. ऐसे ही एक ट्विटर यूजर हैं तारेक फतह, जिनके ट्वीट को देख कर शायद अरविन्द केजरीवाल खुद भी पानी-पानी हो जायें.
on Monday, 14 November 2016
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क्या आ गए ? नोटबंदी के फैसले पर पीएम से लालू का सवाल, 50 दिनों बाद सबके खातों में 15-15 लाख आ जाएँगे क्या
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नोट बंदी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा की हम काले धन के विरुद्ध हैं पर आपके इस तरह के फैसले का असर दिख रहा है आम आदमी की सहूलियत का ख्याल रखना चाहिए था आप को।
लालू ने नोट बंदी के फैसले पर ट्वीट करके पूछा है की “मोदीजी आप 50 दिनों की सीमित असुविधा की बात कर रहे हैं, तो क्या समझा जाए कि आपके वादानुसार 50 दिनों बाद सबके खातों में 15-15 लाख आ जाएँगे” आगे उन्होंने चुटकी लेते हुये ट्वीट किया “अगर ये सब करने के बाद भी लोगों को 15 लाख नही मिले तो इसका मतलब होगा कि यह “फर्जिकल स्ट्राइक” था। और इसके साथ ही आम जनता का “फेक-एनकाउंटर” भी हो गया।”
लालू ने नोट बंदी के फैसले पर ट्वीट करके पूछा है की “मोदीजी आप 50 दिनों की सीमित असुविधा की बात कर रहे हैं, तो क्या समझा जाए कि आपके वादानुसार 50 दिनों बाद सबके खातों में 15-15 लाख आ जाएँगे” आगे उन्होंने चुटकी लेते हुये ट्वीट किया “अगर ये सब करने के बाद भी लोगों को 15 लाख नही मिले तो इसका मतलब होगा कि यह “फर्जिकल स्ट्राइक” था। और इसके साथ ही आम जनता का “फेक-एनकाउंटर” भी हो गया।”
जीत के बाद पहली बार मुस्लिमों पर ट्रंप ने दिया इतना बड़ा बयान
नई दिल्ली ( 14 नवंबर ) :अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने के बाद मुस्लिमों, अफ्रीकी अमेरिकियों और लातिनों के उत्पीड़न पर पहली बार बात की। इन समुदाय के लोगों पर उत्पीड़न से दुखी डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार सार्वजनिक रूप से लोगों से इसे रोकने के लिए कहा।
अमेरिकी एक न्यूज चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, मैं यह सुनकर बहुत दुखी हूं और मैं इसे रोकने के लिए कहता हूं। इसे रोकें।
वह हाल के दिनों में मुस्लिमों, हिस्पैनिक अमेरिकियों, अश्वेत लोगों, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे कथित घृणा अपराधों को लेकर पूछे गए एक सवाल पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे।
ट्रंप से पूछा गया कि क्या आप उन लोगों से कुछ कहना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि ऐसा न करें। यह भयानक है। मैं इस देश को एकजुट करने जा रहा हूं। राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित हुए ट्रंप ने कहा कि समाज के कुछ वर्ग उन्हें लेकर डरे हुए हैं और इसकी वजह यह है कि ये लोग उन्हें ठीक से नहीं जानते हैं। ट्रंप ने उन लोगों से कहा कि वे डरें नहीं।
उनसे पूछा गया कि लोगों के प्रदर्शन को लेकर आपको क्या लगता है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कुछ मामलों में, प्रदर्शनकारी पेशेवर होते हैं। ट्रंप ने कहा कि अगर हिलेरी जीतीं होतीं और मेरे लोग बाहर प्रदर्शन करते तो हर कोई कहता कि ओह, यह खराब चीज है। यह बहुत अलग दृष्टिकोण होता। आप जानते हैं कि यहां दोहरा मानक है।
अमेरिकी एक न्यूज चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, मैं यह सुनकर बहुत दुखी हूं और मैं इसे रोकने के लिए कहता हूं। इसे रोकें।
वह हाल के दिनों में मुस्लिमों, हिस्पैनिक अमेरिकियों, अश्वेत लोगों, अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे कथित घृणा अपराधों को लेकर पूछे गए एक सवाल पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे।
ट्रंप से पूछा गया कि क्या आप उन लोगों से कुछ कहना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि ऐसा न करें। यह भयानक है। मैं इस देश को एकजुट करने जा रहा हूं। राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित हुए ट्रंप ने कहा कि समाज के कुछ वर्ग उन्हें लेकर डरे हुए हैं और इसकी वजह यह है कि ये लोग उन्हें ठीक से नहीं जानते हैं। ट्रंप ने उन लोगों से कहा कि वे डरें नहीं।
उनसे पूछा गया कि लोगों के प्रदर्शन को लेकर आपको क्या लगता है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कुछ मामलों में, प्रदर्शनकारी पेशेवर होते हैं। ट्रंप ने कहा कि अगर हिलेरी जीतीं होतीं और मेरे लोग बाहर प्रदर्शन करते तो हर कोई कहता कि ओह, यह खराब चीज है। यह बहुत अलग दृष्टिकोण होता। आप जानते हैं कि यहां दोहरा मानक है।
भारत के अगले राष्ट्रपति का नाम तय, ये लेंगे प्रणब मुखर्जी की जगह...
भारत के अगले राष्ट्रपति का नाम तय, ये लेंगे प्रणब मुखर्जी की जगह नई दिल्ली, मिडनाइट एक्सप्रेस से साभार : अमेंरिका में राष्ट्रपति चुनाव खत्म हो गए हैं। वहां के बाद अब निगाहें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राष्ट्रपति के चुनाव पर लग गई हैं। वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है। उनके बाद कौन होगा देश का अगला राष्ट्रपति इसको लेकर अलग अलग राजनीतिक दलों में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। केंद्र की मोदी सरकार ने इस मुद्दे पुर अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं।
दरअसल राष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा में आंकड़ों का खेल बेहद अहम हो जाता है। सबसे पहले आपको बताते हैं कि कौन हो सकता है देश का अगला राष्ट्रपति, जिस नेता की हम बात कर रहे हैं उन्हे कभी लौहपुरुष कहा जाता था। वो केंद्र की सरकार में गृहमंत्री भी रह चुके हैं। नहीं समझे। चलिए आपको बता दी देते हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी देश के अगले राष्ट्रपति हो सकते हैं। बीजेपी ने उनको राष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए का उम्मीदवार बनाने का फैसला लगभग कर लिया है। आडवाणी फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर हैं। आडवाणी को राष्ट्रपति बनाकर बीजेपी उन्हे सम्मानजनक तरीके से राजनीति से रुखसत करना चाहती है। लाल कृष्ण आडवाणी के रूप में पीएम मोदी ने एक बार फिर से मास्टर स्ट्रोक चला है। दरअसल आडवाणी के राष्ट्रपति बनने से मोदी को कई फायदे होंगे। पहला तो ये कि भारतीय राजनीति में मोदी का दबदबा और बढ़ेगा।दूसरा ये कि आडवाणी को राष्ट्रपति बनाए जाने से बीजेपी में मोदी विरोधी खेमा लगभग खत्म हो जाएगा। बता दें कि आडवाणी को मोदी विरोधी माना जता है। आडवाणी खुद पीएम बनने का सपना संजोए हुए थे, लेकिन मोदी के कारण उनका सपना हकीकत की रोशनी नहीं देख पाया। अब आपको बताते हैं कि आडवाणी क्यों भारत के अगले राष्ट्रपति बन सकते हैं। दरअसल आडवाणी आज राजनीति के जिस मुकाम पर हैं वहां उनका विरोध करने वाले काफी कम हैं। आडवाणी की राजनीतिक स्वीकार्यता से कोई इंकार नहीं कर सकता है। राष्ट्रपति के चुनाव के लिए लोकसभा में तो बीजेपी के पास बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आडवाणी को आगे करके मोदी ने मास्टरस्ट्रोक चला है। आडवाणी को मार्गदर्शक मंडल में डालने के बीजेपी के फैसले को कांग्रेस ने आडवाणी के साथ नाइंसाफी बताया था। ऐसे में अब वो आडवाणी का विरोध करने की स्थिति में नहीं है। वैसे भी कांग्रेस के पास मोदी को रोकने का संख्याबल नहीं है। बाकी दलों को साधने में कोई दिक्कत नहीं होने वाली है। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि लाल कृष्ण आडवाणी देश के अगले राष्ट्रपति बनने की राह पर चल पड़े हैं।
दरअसल राष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा में आंकड़ों का खेल बेहद अहम हो जाता है। सबसे पहले आपको बताते हैं कि कौन हो सकता है देश का अगला राष्ट्रपति, जिस नेता की हम बात कर रहे हैं उन्हे कभी लौहपुरुष कहा जाता था। वो केंद्र की सरकार में गृहमंत्री भी रह चुके हैं। नहीं समझे। चलिए आपको बता दी देते हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी देश के अगले राष्ट्रपति हो सकते हैं। बीजेपी ने उनको राष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए का उम्मीदवार बनाने का फैसला लगभग कर लिया है। आडवाणी फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर हैं। आडवाणी को राष्ट्रपति बनाकर बीजेपी उन्हे सम्मानजनक तरीके से राजनीति से रुखसत करना चाहती है। लाल कृष्ण आडवाणी के रूप में पीएम मोदी ने एक बार फिर से मास्टर स्ट्रोक चला है। दरअसल आडवाणी के राष्ट्रपति बनने से मोदी को कई फायदे होंगे। पहला तो ये कि भारतीय राजनीति में मोदी का दबदबा और बढ़ेगा।दूसरा ये कि आडवाणी को राष्ट्रपति बनाए जाने से बीजेपी में मोदी विरोधी खेमा लगभग खत्म हो जाएगा। बता दें कि आडवाणी को मोदी विरोधी माना जता है। आडवाणी खुद पीएम बनने का सपना संजोए हुए थे, लेकिन मोदी के कारण उनका सपना हकीकत की रोशनी नहीं देख पाया। अब आपको बताते हैं कि आडवाणी क्यों भारत के अगले राष्ट्रपति बन सकते हैं। दरअसल आडवाणी आज राजनीति के जिस मुकाम पर हैं वहां उनका विरोध करने वाले काफी कम हैं। आडवाणी की राजनीतिक स्वीकार्यता से कोई इंकार नहीं कर सकता है। राष्ट्रपति के चुनाव के लिए लोकसभा में तो बीजेपी के पास बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आडवाणी को आगे करके मोदी ने मास्टरस्ट्रोक चला है। आडवाणी को मार्गदर्शक मंडल में डालने के बीजेपी के फैसले को कांग्रेस ने आडवाणी के साथ नाइंसाफी बताया था। ऐसे में अब वो आडवाणी का विरोध करने की स्थिति में नहीं है। वैसे भी कांग्रेस के पास मोदी को रोकने का संख्याबल नहीं है। बाकी दलों को साधने में कोई दिक्कत नहीं होने वाली है। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि लाल कृष्ण आडवाणी देश के अगले राष्ट्रपति बनने की राह पर चल पड़े हैं।
on Sunday, 13 November 2016
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